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Category: कविताएँ

Hindi
Balkavi-Jai-Jitendra

जय की पराजय -बालकवि जय जीतेन्द्र

हो गये वो हमसे जुदा किसी के लिये तो क्या हुआ, हमें अपनी मोहब्बत पर नाज़ आज भी है। बरसों पहले चाय पी थी उसने

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मोहब्बत को मोहब्बत से जुदा ना करना. -अशपाक तालिकोटे

महोब्बत को महोब्बत से कभी जुदा ना करना. कितनी हंसी डोर है मेरी महोब्बत की जो मेरे दिल से होकर उसके धडकनो से जाकर मिलती

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Hindi
Birendra Kumar dubey

रक्षापर्व -बीरेंद्र कुमार दुबे

सजी कलाई अब धागों से,शुभ मुहुर्त वो आया है। सब बहनो ने मिल भैयों संग,ये त्योहार मनाया है।। भाई बहन का ये पर्व निराला,घर घर

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Hindi
Raxcy-Bhai

खुद का हिस्सा समझता है -रसस्य भाई

दो हाथ, दो पैर पाकर खुदको इंसान समझता है ! इंसानियत दिखाकर एकबार खुदको भगवान समझता है !! भगवान कैसा है, तू इंसान कैसा है

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Hindi
TANVI-VYAS

सावन की रीत -तन्वी व्यास

“सावन की रीत” सूरज मुख अभिमुख आभार रूप किरण नारंगी प्रकाश-सार व्योमिपाग गिरी-नग पहनकर श्वेत छाया की सरस धुंध-कर प्रहर-प्रहर विदर्शित अनुभव बढ़ा रहस्य पूर्ण

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उठो जागो भारत वासियों -सुनीता प्रजापत

हे भारतवासियों कब तक है, यूं ही सोते रहोगे तुम ‌। इस मां पर भ्रष्टाचार को, कब तक सहते रहोगे । जब तक भ्रष्टाचार रहेगा,

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Hindi
Sunita-Prajapat

हमें रखो आजाद -सुनीता प्रजापत

हमें रखो आजाद ना बांधो इन्हें पिंजड़ों की दीवारों में। हम यूं बंद रह कर इन पिंजड़ों मैं भूल रहे हैं, अपनी स्व प्रतिक्रिया। हम

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।।चलो गुरुबत्त के रास्ते।। राकेश खिचार बिशनोई

दिल का दरिया नदी बन जाता है। जब एक नाला और मिल जाता है।। आंखें आंसू के लिए तरसे । सुखी आंखें अब न बरसे।।

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सच-सच बताना यारों याद आती है कि नहीं -बालकवि जय जीतेन्द्र

सच-सच बताना यारों याद आती है कि नहीं, वो चलते-चलते पेड़ पर पत्थर मारना, फिर इधर-उधर देखना, फिर चुपके से आम उठाना, पकड़े जाने पर

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