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अपने जन्म पर नाराज़ मां से एक बेटी का सवाल

“अपने जन्म पर नाराज़ मां से एक बेटी का सवाल ”

मेरा क़ुसूर क्या है क्या है मेरी ख़ता
मां तू मुझको बता मां तू मुझको बता 2
तूने जन्म मुझको दिया फिर क्यों तू ही है मुझसे ख़फ़ा
मां तू मुझको बता मां तू मुझको बता ।।
मां तूने था बेटे का सपना सजाया
मुझसे ना तूने रिश्ता निभाया
कभी प्यार से मुझको देखा ही नही
मैंने क्या है तेरा चुराया
किस लिए दी है मुझको सज़ा
मां तू मुझको बता मां तू मुझको बता
मेरा क़ुसूर क्या है क्या है मेरी ख़ता
मां तू मुझको बता मां तू मुझको बता ।।
जब दुनिया मे आकर मैंने आंखो को खोला
सारे जहां ने मुझको मनहूस बोला
मलाल ना था ज़रा भी ज़माने का मुझको
यक़ीं मेरा टूटा जब तूने भी मुझको
भेदभाव के तराज़ू मे तौला
ज़िंदगी मुझको देकर क्यूं कर दिया अपने दिल से जुदा
मां तू मुझको बता मां तू मुझको बता
मेरा क़ुसूर क्या है क्या है मेरी ख़ता
मां तू मुझको बता मां तू मुझको बता ।।
तेरी बेटी हूं मां मैं नही हूं पराई
फिर तुझको नज़र आई क्या मुझमे बुराई
तेरे अरमानो का क्यूं मैं हिस्सा नही हूं
हक़ीक़त हूं मैं कोई क़िस्सा नही हूं
बस प्यार की तलब ही तो की तुझसे मैंने
फिर क्यूं दी है तूने मुझको दग़ा
मां तू मुझको बता मां तू मुझको बता
मेरा क़ुसूर क्या है क्या है मेरी ख़ता
मां तू मुझको बता मां तू मुझको बता ।
तूने जन्म मुझको दिया फिर क्यूं तू ही है मुझसे ख़फ़ा
मां तू मुझको बता मां तू मुझको बता ।।

                  महक अंसारी 

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