कलाम को मेरा सलाम Poem By Sachin A. Pandey

कलाम को मेरा सलाम

हुआ था एक बुद्धि-सम्राट,
कथा है जिसकी बहुत विराट;
कभी न भाया जिसे आराम,
उस कलाम को मेरा सलाम।

हिंद को किया परमाणु प्रदान,
वह था धरणी माँ का वरदान;
जिसने किए खोज तमाम,
उस कलाम को मेरा सलाम।

जो `मिसाइल मॅन´ कहलाया,
शास्त्र जगत में इतिहास बनाया;
जिसको प्यारी सारी आवाम,
उस कलाम को मेरा सलाम।

जिससे प्रेरित बूढ़े-जवान,
उर से करूँ उसका गुणगान;
चित्त के जिसके कोई न दाम,
उस कलाम को मेरा सलाम।

धन्य हुई माँ उसको पाकर,
कितनी होगी वह जननी महान;
जन्मा न फिर ऐसा मानव आम,
अब्दुल कलाम को मेरा सलाम।
– सचिन अ. पाण्डेय

Sachin Pandey

मैं सचिन पांडेय मुंबई महाराष्ट्र का निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस का कवि हूँ।

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