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कुछ करें

जीवन भर जब चलना ही है, कोई तो पग चिन्ह बनाएं ।
शक्तिमान भारत सृजित हो , पद चिन्हों को अस्त्र बनाएं ॥
विकराल स्थिति समय जटिल है,
कह पाना कुछ भी मुश्किल है,
किस और ऊंट बैठेगा
हर और सांप का बिल है ।
हर घर में विषधर सोया है, द्वारे -द्वारे बीन बजाएँ ॥ कोई तो पग चिह्न बनायें ॥
गौरव गाथा गाते गाते ,
पले बढे हंस मुस्काते,
भयभीत नहीं होते भय से
चट्टानों से ठोस इरादे ,
लक्ष्य विजय करना ही है तो मंजिल से क्यों घबरायें ॥ कोई तो पगचिह्न बनाये ‘ ॥
आओ अश्वमेघ करें,
धीरज और विवेक धरें,
कायरता को त्याग
माँत के कष्ट हरें,
कुछ ना कुछ करना ही है तो चलो चले कुछ कर दिखलायें ॥ कोई तो पगचिहन बनायें ॥
आज अभी यह प्रण कर लें,
तन दें ,मन दें, धन दें ,
देकर अपनी सांसों को
मातृभूमि को जीवन दें,
सर्वस्व न्यौछावर कर के भी, शायद कुछ कर पाऍं ॥ कोई तो पगचिह्न बनायें ॥

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