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// पहला प्रेम पत्र //

इस पन्ने पर ,
समेटता हुआ, कुछ शब्दों में,
अपनी भावनाओं को,
लिख रहा हूं तुमको ।।
सामने आकर नहीं कह सकता,
कहना चाह कर भी,
कहने का साहस नहीं,
डर लगता है मुझको ।।

समर्पित हूं तुम्हारे लिए,
पर विरक्त हूं
तुम बिन/तुम्हारे लिए
और स्वयं अपने लिए ।

कर लिया है आत्मसात
मैंने तुम्हें इतना कि,
क्यों / किसलिए खुद से,
आत्मसात करने लगा हूं ।।

असीम अदृश्य दर्द लेकर,
कल्पनाओं के अथाह सागरों में,
उतरकर तैरना चाहता हूं मैं,
तुम्हारी स्मृतियों की लहरों में ।।

तुम अनंत आकाश को
अपनी आगोश में ले कर,
लेना चाहता हूं तुम्हारे,
चांद से चेहरे का चुंबन
मगर रुक जाता हूं देखकर
तुम्हारा सुनापन ।।

शायद/इसलिए
मेरा यह मन,
नहीं कर पा रहा था व्यक्त,
अपनी भावनाओं को,
तुमसे /तुम्हारे प्रति
और स्वयं अपने प्रति ।।

इन्हीं कुछ शब्दों में,
कर दिया है मैंने,
अपनी प्रेम की अभिव्यक्ति
तुमसे/तुम्हारे प्रति
और स्वयं अपने प्रति ।।।

मेरे खत का जवाब तुम ,
देना चाहो या ना चाहो
पर एक बात सोच लेना,
दुनिया में मेरा कोई नहीं
तुम ही मेरा सब कुछ हो ।।

हर घड़ी/ हर पल
रहूंगा तुम्हारे सामने
मेरे खत के सवाल के ,
जवाब के इंतजार में ।।

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Chinta-Netam

Chinta-Netam

मेरा जन्म 16 अक्टूबर सन 1975 में छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग जिले में स्थित बुंदेली नामक ग्राम में संघर्षरत परिवार में हुआ था। मेरी शिक्षा दीक्षा राजनांदगांव जिले में स्थित एक छोटे से कस्बेडोंगरगांव में हुई। 1992_93 में12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मेरा चयन d.ed प्रशिक्षण के लिए हो गया। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद मैंने डोंगरगांव शासकीय महाविद्यालय से बीए की परीक्षा सन 2000 मेंउत्तीर्ण की। वर्तमान में मैं शिक्षा विभाग में कार्यरत हूं।

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