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बंधन मुक्त जिंदगी

जीने को दुनिया जीती है पर जीने में मजा नहीं है ।
बेवजह जिंदगी जिए जा रहे जीने की कोई वजह नहीं है ॥
देखो !जीवन पथ भरा पड़ा है, एक राह के सभी मुसाफिर ,
जिसका धर्म अलग हो जाए वह हो जाता है काफिर ,
अर्थ नहीं कोई जीवन का बस भेड़ चाल है,
धन से भरी तिजोरी है पर दिल में थोड़ी सी जगह नहीं है ॥ बेवजह – — — –
पिता पुत्र और पति पत्नी में विश्वास नहीं है आखिर क्यों ,
सास बहू और बहन भाई को रिश्तो का आभास नहीं है आखिर क्यों,
हर कोई शक्तिवान है ज्ञानवान है जैसे हो भगवान ,
सारे रिश्ते ज्यों के त्यो पर कोई किसी का सगा नहीं है ॥ वेवजह जिन्दगी .. — —-
इंसा से इंसा दूर हुआ है तन से मन से धन से,
ज्यों सारी इंद्री अलग अलग हों मानव के जीवन से,
छीन झपट कर धोखे से हथियाता स्वजन का हिस्सा,
संत मंडली में भजन सुनाएं कहता अच्छी दगा नहीं है ॥ वेवजह जिन्दगी —- — – –
पत्नी बच्चे छोड़ भागती पति परस्त्री गमन करें,
भाईचारा त्याग के नर्वसअमिट शत्रु को नमन करें,
जीवन की अमिट कड़ी थी रिश्तो का बंधन टूट गया,
मांग रहे हैं जिन से मुक्ति यह बंधन कोई सजा नहीं है ॥
बेवजह जिंदगी जिए जा रहे जीने की कोई वजह नहीं है ॥

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ajai-pratap-singh

ajai-pratap-singh

My name is Ajai pratap Singh. M . A . B.Ed. 1996 ( c c s uni . Meerut ) Unemployed . I am a simple farmer.I lives in charora .I am p.t.a in siksha sadan inter College jatpura.

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