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ये दुनियाँ बड़ी जालिम है! Poem By Pranay Kumar

ये दुनियाँ बड़ी जालिम है!

मन करता है कहीं भाग जाउँ
मन कहता है कहीं रुक भी जाऊँ
कोई परया अपना सा लगता है,
कभी अपना पराया सा लगता है
बड़े असमंजस में हूँ;
किसके साथ रहूँ और किसे छोड़ जाऊँ?
ये दुनियां बड़ी जालिम है!

मन करता है कुछ बड़ा कर जाऊँ,
मन कहता है कुछ भूल न जाउँ
बड़े असमंजस में हूँ;
क्या करूँ और क्या भूल जाऊँ?
ये दुनियाँ बड़ी जालिम है!

मन करता है रोने लग जाऊँ
मन कहता है चुप भी हो जाऊँ
बड़े असमंजस में हूँ;
क्यों चुप हो जाऊँ और क्यों रोने लग जाऊँ?
ये दुनियाँ बड़ी जालिम है!

कभी पराए आँसू पोंछते हैं
कभी अपने आँसू दे जाते हैं
बड़े असमंजस में हूँ;
किसे अपना और किसे परया मान लूँ?
ये दुनियाँ बड़ी जालिम है!

लेखक :- प्रणय कुमार Pranay kumar

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2 thoughts on “ये दुनियाँ बड़ी जालिम है! Poem By Pranay Kumar”

  1. 727711 503472 An interesting discussion is worth comment. I feel which you really should write a lot more on this topic, it might not be a taboo subject but generally folks are not enough to speak on such topics. Towards the next. Cheers 244252

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