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वंदन Poem by विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’

हे सत्य सनातन
हे अनंत
हे शिव भोले
हे जगत-कंत

हे शक्ति नियंता
संघारक
हे डमरू,त्रिशूल
के धारक

हे महादेव
हे शिवा पति
तव ध्यान मग्न
सब योगी-यती

ले अतुल भक्ति
विश्वास धार
मैं रहा आज
तुझको पुकार

मम् वंदन को
स्वीकार करो
इस धरती के
संताप हरो…

***********
        

Vishwambhar Vyagra

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p dir=”ltr”>-विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’
           गंगापुर सिटी (राज.)

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Vishwambhar Vyagra

Vishwambhar Vyagra

मैं विश्वम्बर व्यग्र गंगापुर राजस्थान का निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस का कवि हूँ।

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