आग की मस्तानी चाल – मुनमुन सिंह

आग की मस्तानी चाल – मुनमुन सिंह

आग की है कितनी मस्तानी चाल
बरसात में एक तिनका भी नहीं जला पाती।
गर्मी में पूरा घर को जला देती।
आग की है कितनी मस्तानी चाल
ठंडी में सबको अपने पास बुलाती।
गर्मी में अपने पास से सबको भगवती।
आग की है कितनी मस्तानी चाल
यही संसार में है उजाला करती।
यही लोगों की जिंदगी है बनाती।
यही लोगों की जिंदगी है बिगाड़ती।
आग की है कितनी मस्तानी चाल

–मुनमुन सिंह

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