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आग सभी लगा रहे हैं-ज्ञानंद -चौबे

आँखें कुछ बोल रहे हैं
नज़रें कुछ तौल रहे हैं
किसमें है कितना दम
राज सब खोल रहे हैं ।

सपने सब सजा रहे हैं
प्यार सभी जता रहे हैं
कौन है कितना अपना
सभी को बता रहे हैं ।

दिल सभी जला रहे हैं
व्यथा सभी सुना रहे हैं
कौन कितना जलता है
आग सभी लगा रहे हैं ।

द्वेष सभी फैला रहे हैं
राग आलाप रहे हैं
नाक में करके दम
सभी को झूठला रहे हैं ।
✍️ ज्ञानंद चौबे
केतात , पलामू , झारखंड

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