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आईना – सचिन ओम गुप्ता

इस जीवन में हैं बहुत मुश्किलें
कोई जीवन का आईना दिखा जाता है
कोई जीवन का आईना मोड़ जाता है|

आईना जो देखा मैंने, कुछ न कुछ तो बात है,
चेहरे की सिकन बता रही है,आज खुल रहा कोई राज है|

आईने में अक्सर अपना चेहरा देखकर खुश हो लेता हूँ
जीवन में है कोई मेरे साथ ,ऐसा सोच लेता हूँ|

आजकल होश भी नहीं रहता है किसी चीज़ का मुझे,
इस सितमगर दुनिया ने क्या ख़ूब आईना दिखाया है मुझे|

जब भी सवार हो भूत घमण्ड का इन्सा तुझमें,
खुद को एक बार निहार लेना आईने में|
खुद को एक बार निहार लेना आईने में|

Sachin Om Guptaसचिन ओम गुप्ता,
चित्रकूटधाम

(उत्तर प्रदेश)

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Sachin Om Gupta

Sachin Om Gupta

मैं सचिन ओम गुप्ता चित्रकूट धाम उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस का कवि हूँ।

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