अाज सच मिल गया – पूजा चौहान

अाज सच मिल गया – पूजा चौहान

आज सच मिल गया
कहीं खो ना जाए
जागी है चेतना
वक्त की आंधी से कहीं सो ना जाए |

रास्तों पर फूल है आज
कांटों भरा दौर फिर से चला ना आए

सच्चाई उफान पर है आज
कोई तूफान इसे उड़ा न ले जाए

इतना सबर हो मुझ पर
कि कोई झूठ बहा ना ले जाए

निगाहों में धूल है भरी
मेरी नजरों में समा ना जाए

जलती मशाले हैं हर कहीं
इसकी लपटे मुझे जला ना जाए

कदमो ने सही राहे हैं पकडी
पैर कहीं लड़खड़ा ना जाए

आज सच मिल गया
कहीं खो ना जाए
जागी है चेतना
वक्त की आंधी से कहीं सो ना जाए

उम्मीदों का दामन थामा है
किसी आहट के डर से ,छूट न जाए

ख्वाबों का ताज पहना है
किसी लम्हे की डोर से ,टूट ना जाए

खामोश सा अफसाना पानी पर लिख डाला है
एक सैलाब से ,दूर ना हो जाए

एहसासों को पनपने से रोक डाला है
कहीं कोई आंसू भीगा ना जाए

इस पल खुशी को लबों पर सजा डाला है
अगले पल कहीं छूट न जाए

सच को साक्षी बनाकर, आंखों में कैद कर डाला है
कहीं झूठ के वार से रूठ न जाए।।

Pooja Chauhanपूजा चौहान
हमदर्द नगर, नई दिल्ली

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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