आजादी की कहानी-नीलम कुशवाह

आजादी की कहानी-नीलम कुशवाह

करना पड़ा संघर्ष बहुत,
तब जाके हुए हम आजद |
हम सब है भारतवासी,
बड़ी मुश्किल से एक हुई आवाज |
किसी ने दिया बेटा,
किसी ने अपना पति दिया |
किसी के हाथ पॉव में जंजीर लगे,
किसी ने खुद को ही त्याग दिया |
कितने त्याग किये भारत ने,
कितनी गाथा मैं तुम्हें सुनाऊँ |
कितनी तड़पी भारत माँ,
उनके दर्द का एहसास कराऊँ |
कभी न आंसू थमते थे भारत के,
कभी न उसने आराम किया |
बिलखते बच्चों को देख तड़प उठती माँ,
जबसे अंग्रेजो ने हमे गुलाम किया |
अपने घरों में रह कर भी अजीब सी ये लाचारी थी,
पास रहकर भी थी अपनो से दुरिया,
न जाने कैसी ये बिमारी थी |
संघर्ष किया वीरो ने,
तब भारत को नवजीवन मिला |
चले गए वो वीर सपूत,
भारत को फूलों जैसा खिला |
बड़ी मुश्किल से हम हुए आजाद,
फिर जाति -पाती के न तुम गुलाम बनो |
हर इन्सान है अल्लाह का बंदा,
सबका तुम सम्मान करो |
कोई मजहब न छोटा,
कोई जाति न बड़ा है |
हर जाति-धर्म से पहले,
देखो मानवता खड़ा है |
तुम हो भारतवासी,
पहले तुम इन्सान बनो |
यही है भारत माँ का संदेश,
न फिर गुलाम बनो |

 

     नीलम कुशवाह

कुशीनगर ,उत्तर प्रदेश

Neelam Kushwaha

मैं नीलम कुशवाहा कुशीनगर उत्तरप्रदेश की निवासी हूँ। मैं कविताओं के साथ-साथ कहानिया भी लिखती हूँ।

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