आम आदमी की व्यथा – रवि कान्त अगृवाल

आम आदमी की व्यथा – रवि कान्त अगृवाल

जो भी कहुंगा सच ही, नए साल की कसम
ताजा बना दामाद हुं , ससुराल की कसम
महंगाई का मारा हुं , रोटी दाल की कसम
मैं आम आदमी हुं , केजरीवाल की कसम

रवि कान्त अगृवाल

पुणे

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