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Aarakshan :: आरक्षण By दीपक कौशिक

Aarakshan :: वंदे मातरम मैं दीपक कौशिक, हरियाणा राज्य के भिवानी जिले के पुर गावँ का निवासी हूँ । जो समाज में मुझे दीखता है वही मैं अपनी कविताओं में लिखता हूँ । “जो देखा वो लिखा” कुछ समय पूर्व हरियाणा में आरक्षण को लेकर आंदोलन हुआ जिसने हिंसक रूप ले लिया था । उसी विषय पर मेरी ये कविता आरक्षण लिखी गई है ।

 # Aarakshan # RESERVATION #आरक्षण

जाति का गुरुर आया है मेरे गावँ मे;
अब लगता है मेरा भी घर जला दिया जाएगा ।।

कपड़े लत्ते, रोजी रोटी सब जला कर ख़ाक किए;
अपने ही बने बैताल हमको कौन बचाएगा ??

इज्जत लूटी, डाका डाला, हत्या सरे आम हुई:
यही आंदोलन है तो देशभगतो को रोना आएगा ??

उजड़ गई है मांग, महंदी की महक फीकी पड़ी;
और कितनी दुल्हनों को बेवा तू बनाएगा ??

बस कर ये शहर भी मरघट जैसा लगता है;
कब तक अपनों के खून से सड़क को नहलायेगा ??

न बंदिशे है न रोक है, तमाशा बन गई जिंदगी;
सहम गया है शहर सारा इसको कौन हंसाएगा ??

अपने ही बेटों ने भारत माँ को नोच डाला;
गैरों के चहरे पर फिर मलाल कहाँ से आएगा ??

फुट आपस की नफरत पैदा करती है;
घर के आँगन में कोई फिर कोई दीवार खड़ी कर जाएगा ।।

जाति के नाम पर मच गया आतंक;
मासूमो के हाथों से खंजर कौन छुड़ाएगा ??

आदमी में आदमी का खातिर दया अब है नही;
आदमी की जात का पता कैसे लगाया जाएगा ??

हथियारों से कब सुलझा है कोई मसला;
बात से ही बात का हल निकाला जाएगा ।।

हाथों में पत्थर है, जुबां पत्थर की दिल पत्थर का;
हैवान बन गया है उसे इंसान कौन बनाएगा ??

लग गई गर सेना दंगाइयों से ही लड़ने में;
देश की सरहदों को दुश्मनों से कौन बचाएगा ??
©दीपक कौशिक

deepak kaushikमैं दीपक कौशिक हरियाणा राज्य के भिवानी जिले के पुर गावँ का मूल निवासी हूँ ।
 मैंने हरियाणा में रत्नवाली फेस्टिवल जिसमे पुरे हरियाणा के कॉलेज यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी हिस्सा लेते हैं। उसमें अपनी कविताओं के माध्यम से दूसरा स्थान प्राप्त किया है ।
मैं एक समाज सेवी के तौर पर राजीव दीक्षित मेमोरियल स्वदेशी उत्थान संस्था का सदस्य हूँ । राष्ट्रीय स्तर पर संग़ठन निर्माण व आईटी टीम का मेंबर हूँ ।
भारतीय जनता पार्टी का भिवानी जिले का आईटी सेल प्रमुख हूँ ।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 4 ब्लॉक कॉर्डिनेटर भी हूँ ।
साथ साथ ही मैंने पोलिटिकल साइंस में अपनी पढ़ाई भी जारी रखी है ।

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