आती क्यो नही-अरुण आज़ाद

आती क्यो नही-अरुण आज़ाद

मेरे ज़हन मे
ये बात आती है
कि वो हक़ीकत मे
क्यो नसी आती है …
जमा बर्फ पिघल जाता है
सावन आ निकल जाता है
कश्मीर कभी सफ़ेद
कभी लाल होता है ….
इस छोटे शहर में
वीरान घाटियो मे बने
बर्फ के घर में
तेरी यादें है
तेरी मोहब्बत है
तेर लगायी बागवानी है
पगडंडियो पर हमारी कहानी है
हा ! एक शिकायत है
कि तुम ख्वाब मे आती हो
हक़ीकत मे क्यो नही ।।

 

Arun Azad        अरुण आजाद
  रिसिया, बहराइच उत्तर, परदेश

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