अब तो पास आओ न-गुंजेश शर्मा

अब तो पास आओ न-गुंजेश शर्मा

आ गया हूं दूर चलके
अब तो पास आओ न
रूठकर कब तक रहोगे
बस यही बताओ न ।
इस सफर का हमसफर तू
तुझसे ही ये प्रीत है
प्रीत के बंधन में तुम
खुद को तो भुलाओ न ।
याद आती है मुझे
वो बात तुने जो कही
की ,इस सफर का हमसफ़र तू
तुम ही है मंज़िल मेरी ।
याद है वो दिन मुझे
वो दिन भी क्या हसीन थे
दूरियां तो थी बहुत
फिर भी तुम करीब थे।
पूछो इन सितारों से
फूलो से बहाड़ो से
क्या है दशा मेरी
बस तेरी तालाश में।
तुम मील तो सब मिले
बस यही तो बात है
इस भड़ी जहान से
न कोई तलाश है।

 

    गुंजेश शर्मा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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