अच्छे दिन-माधव मुले

अच्छे दिन-माधव मुले

रफतार रोज दहशद की
बढ रही है भारत मे
मोहबत गौरी लंकेश के
सुहाने दिन वो लौटा दो

ये अच्छे दिन की परिभाषा
हमे मत सिखावो तुम
आरक्षण मांगते मर गया जो भाई
ऊसे वापस लाके दिखा वो तुम

नोट बदले जैसे आप
इरादे भी बदलते हो
हर एक दिन नये जगहपर
दौरे पे चलते हो

क्या अच्छे दिन यही है
तुम हमसे कहेंगे क्या
मराठा आरक्षण खातीर
मेरे भाई मरते रहेंगे क्या

ये अच्छे दिन तुम्हारे
जान लेलेंगे मराठो की
गुजारीश है अरे साहब
पुराणे दिन ही लौटा दो

 

Madhav Mule

 

 

माधव मुले

Madhav Mule

मैं माधव मुले पुणे महाराष्‍ट्र का निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस का कवि हूँ।

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