अजनबी बन के गुदगुदाया ना करो – आनंद मिलन

अजनबी बन के गुदगुदाया ना करो – आनंद मिलन

अजनबी बन के गुदगुदाया ना करो,
सामने आ के पहचान छुपाया ना करो…..।

अंदाजे बया सब वही सलीका भी वही,
ऐसा लगता है पहले भी मिल चुके कभी।
आदत तुम्हारा जुबा खामोशी का गया नहीं
हर बात दिल में रख छुपाया ना करो…..।

तेरे जुबा से सुनने को तरसती रह गई,
मैं देखते देखते गैरो की होकर रह गई।
जाने कियो तुझे ओ बात कहने आया नहीं
मुझे हँसा अपनी आँसू छुपाया ना करो…..।

चलो फिर से जीवन की शुरुआत करे,
“मिलन” नसीब में नहीं दोस्ती ही करे।
हमारा दोस्ती भी खुदा को रास आया नहीं
हम दूर रहे फिर भी भुलाय ना करो……।

Anand Milan आनंद मिलन
सिंहवाडा, दरभंगा (बिहार)

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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