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एक बात ….-विकास गुप्ता

जिंदगी के हर मोड पर
कमजोरों को मोड दिया जाता है
उसपर धौस जमाकर
मानो उसे खरीद लिया जाता है

खेल बड़ों का हो या बच्चों का
सबसे कमजोर को दबा दिया जाता है
मैदान के एक कोने मे खडा कर उसे
सबसे ज्यादा भागा – दौड़ी कराया जाता है

खेल मे उसे रखना बस एक बहाना होता है
जिससे बचा जाए वो सारे काम कराना होता है
खेल मे जीत तो उसे भगाया जाता है
अगर हार तो उसका सारा गुस्सा उसपर निकाला जाता है

इसी दुराचार अन्याय के कारण
वो कमज़ोर अकेला रह जाता है
न ही किसी से मिलता है और न ही कही बाहर जाता है
अंदर ही अंदर वो डब्बू बन जाता है

कमजोरों को न सताकर उनका साथ दे
लोगों का हौसला पाकर वो जुगनू भी सूरज बन जाता है
बस इतना सा ही कहना था मुझे बिना साथ पाएं
वो मानसिक तनाव का रोगी बन जाता है

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