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एकता में बल-आकाश

देख लेना एक दिन हम जीत जाएंगे
रह भरोसे भाग्य के हम ना पछताएंगे
मौत को भी होगी उल्फत जीत जाएंगे
सीना फाड़ के अब हम भी उसको दिखलाएंगे.

किस्मत से भी उस दौर को अब खींच लाएंगे
हर डर पे अब तो अपनी हम जीत पाएंगे
रह भरोसे भाग्य के अब ना पछताएंगे
सीना फाड़ के अब हम भी उस को दिखलाएंगे

चार दिन का है नहीं ये उठना पड़ता है
झुकना पड़ता है मुसाफिर रुकना पड़ता है
आग का ये खेल है जलना पड़ता है
चलना पड़ता है मुसाफिर चलना पड़ता है

सांसे थाम के जीना पड़ता है
सम्मान खातिर अपनी लड़ना पड़ता है
आग का ये खेल है जलना पड़ता है
चलना पड़ता है हां चलना पड़ता है

उठो! उठो !उठो! उठो!!
कब तक सोओगे
चलो बढ़ाओ अब कदम
कब तक रोओगे
हिंदू मुस्लिम सिख ईशा…
हम सब एक हैं

अब देखते हैं जोर कितना वो लगाएंगे
तूफान आने दो हम उसमें नहाएंगे
देश के सम्मान में सर भी कटवाएंगे
पर देश के ईमान को हम बचाएंगे
हम बचाएंगे हम बचाएंगे…

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