अलबादी छौरे ने लिखी कविता

अलबादी छौरे ने लिखी कविता

सरकारी स्कुल के सीसे फोडे
इथाई की छोडी ना ईंट
जोड कुएँ नाम के रहगे
चोरी त पडोसियाँ की छोडी ना ईँख
जाण बुजके न नहर तोडदी

सारा गाम के खेत दिए सीँच
घरा मेँ पाणी चडग्या
फेर पाटगी फिँच
मजे-मजे म सारा देश लिया लुट
कोण माहरा के बिगाडगा- 2
अह्म हैँ इस देश के नीच

खुब लिए पंगें, उजाड दिया देश
सोने की चिडिया के हम्न पाड दिए पाँख
किले गिरवी प धरके न
लोगा न रिश्वत देके न
हम तो करगए M.B.A
नौकरी कान्या चालण लागे
घरके गुदडे बिकण न होगे
फेर माहर समझ म आई
कदे पड लेँदे तो

खुब पढागेँ-लिखागेँ, अर देश का नाम
चाँद-सितारे की तरया चमकावांगे
भ्रष्टाचार, लुट-डकैत आपे खत्म होज्यगे
जद आपाएँ इनत दुर रवाँगे

अर अंत म आशीष घोडेला नूए क्हवगा
कदे रश्वत ना लेवागेँ अर नर देवांगे
फेर आपण देश सोने की चिडिया ना
सोने का मोर क्हलावगा॥
आशीष घोडेला।

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