तन्हाई ने मुझसे सबाल पूछा- अनुश्री दुबे

तन्हाई ने मुझसे सबाल पूछा- अनुश्री दुबे

मैं अकेली जग रही थी
पीड़ा इतनी सही न गई
खिड़की के पास बैठ गई
अचानक एक आवाज आई
मेरे कारण परेशन हो ‘अनु’
मैं घबरा गई मैंने पूछा
कौन हो तुम सामने आओ
मैं वैसे ही परेशान हूं
तुम भी मेरे जख्मों पर
क्या नमक डाल रही हो
वो रो पड़ी और बोली
एक पल को पहचानों मुझे
हरपल तुम्हारे साथ रहती हूं
मुझे कभी नहीं भूलती हो
तुम्हारे मन में रहने वाली
तुम्हारे मन की तन्हाई हूं

 

    Anushree Dubey

   अनुश्री दुबे

इटावा, उत्तर प्रदेश

 

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