अनोखा बन्धन -जी के जसनाथी

अनोखा बन्धन -जी के जसनाथी

कहा से लिखना शुरु करुँ
वे अजीब से पल जिन्हें मैं याद‍ करुँ ।
अनोखा सा रिश्ता था वह
अजिब सा प्यार था वह।
साथ रहे अहसास नहीं
दुर गये तो भुले नहीं ।
चेहरा हमेंशा वह याद आता है
कमबख्त बहुत रुलाता है ।
खून का रिश्ता नहीं था
न दोस्ती का नाता था ।
बहुत प्यार किया था तुमसे
कभी कह पाये ना तुमसे ।
आज तुम मेरे साथ नहीं
मैं तुम्हारे पास नहीं ।
फिर भी प्यार है कि कम होता नहीं
क्या दोष दे इस कमबख्त दुनिया को
दरिंदों कि कमी नहीं औलाद बङे बाप कि ।
हिम्मत तुम हार गयी
अपने ही हाथों अपने को मार गयी ।
एक बार भी न सोचा तुने
क्या गुज़रेगी मेरे दिल पर ।
मर मर के जी रहा हु
बिन तेरे इस दुनिया मे ।
यमराज से छुट्टी मिले एक दफा लोट आना तुम
अपना प्यारा सा मुखङा दिखाना तुम ।
ईश्वर से एक मुराद बाकि है
देख पाउ तुझे यह चाह बाकि है।
5. एक पत्र भागे आशिक के नाम
क्या देखा उस लङकि मे तुने
जो बिन बताये घर से भाग गया तु ।

जिस माँ ने तुझे पाला था
उसे ही रुला गया तु ।

जिस पिता ने तेरे लिए खायी दर दर की ठोकरें थी
उन्हें ही जलील कर गया तु ।

न जाने कितने सपने पाले थे तेरे पिता ने
बङे होकर सहारा देगा तु ।

ना जाने क्या देखा तुने उस‌ लङकि मे
अपनों को ही गैर बना गया तु ।
प्यार के साल बिते दो चार होंगे
उन्ही माँ बाप को याद करके रोया होगा तु ।
कोसा होगा तुने उन दिनो को
जब घर से भागा तु ।

मिलना चाहे माँ बाप से
वापस आये किस मुह से तु ।

पर तु क्या जाने माँ बाप है वे
माफ हो जायेगा तु ।

एक बार घर आकर तो देख
फिर से आसरा पायेगा तु ।

उस दिन उनका छिना छोङा हो जायेगा ”गोविंद”
जब उनकी चिता को आग देगा तु ।

 

जी के जसनाथी

0

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account