Notification

अपनापन-माला-चौधरी

दौड़ती भागती जिंदगी का यही तोहफा है
खूब लुटाते रहे अपनापन फिर भी लोग खफा है
💔
उम्र जर्जर होने लगी सबको अपना बनाने में
फिर भी मेरा अपना ना हुआ कोई जमाने में
💔
वो अपने जिन्हें अपना समझ ,हम खुश हो रहे थे
मालूम ना था कि वो मज़बूरी में हमारा बोझ ढों रहे थे
💔
अब होश आया तो समझ आया कि सब धोखा था
चाहा पकड़ लें हाथ बढ़ा कर
मगर गायब हो गया हवा का झोखा था
💔
बेख्याली में मेरे हाथ ढूंढते हैं उन अपनों को
लेकिन अकेली खड़ी हूं आज मै
ना कोई भी मेरा हमराज हमनवा है
💔
दौड़ती भागती जिंदगी का यही तोहफा है
खूब लुटाते रहे अपनापन फिर भी लोग खफा हैं
💔

Leave a Comment

Connect with



Join Us on WhatsApp