अर्ध जीवन-बबीता खंडूरी

अर्ध जीवन-बबीता खंडूरी

बताओ कौन करेगा प्यार उन्हें
कौन करे परवाह उनकी भी
सुख-दुख की बातों में उनको
कौन करें शामिल भी
कौन समझेगा उनके एहसास
कौन उन्हें रब से मांगेगा
वो हैं बिन जली सी लाशें
उनका तर्पण कौन करेगा
सजी-धजी दुल्हनों सी है वो
बोलो कौन उन्हें ब्याहेगा
भूल चुकी है जीने का मकसद
कौन उन्हें बतलायेगा
जिंदा होने का एहसास
आखिर कौन उन्हें कराएगा।

वो भी है कलियों के जैसी
बस खुशबू कहीं गुम सी है
वो भी है लेहराती बेल
बस सूखी पड़ी बेजान सी है
कौन शिँचेगा उनकी जड़े
कौन बनेगा माली उनका
कौन करे सिंचाई है
वो भी हैं इस गुलिस्ता के फूल
कौन उन्हें समझाएगा
जिंदा होने का एहसास
आखिर कौन उन्हें कराएगा।

सिमट रही है रोज ही
बिखर रही है सेज पे
सिलवटों संग रोज ही
कुचल रही है उनकी देहं भी
कौन उनके जख्मों पे
अपनेपन का मरहम लगाएगा
जिंदा होने का एहसास
आखिर कौन उन्हें कराएगा।

मिलते हैं प्यार उन्हें
रोज ही उन गलियों में
पल भर थम के
निचोड़ अस्मत का रक्त
लौट फिर वो जाएगा
मोल दिया है उन लाशों का
चलती फिरती खाली सांसो का
ये खरीदार को कौन बतलायेगा
जिनमें जीवन कहीं हैं खो गया
उस जीवन की आत्मा तक
बोलो कौन उन्हें लेजाऐगा
जिंदा होने का एहसास
आखिर कौन उन्हें कराएगा।

रिश्तों से हे वो दूर हुई
जीवन मे हे मजबूर बड़ी
कुलवधू बना कर अपनी
बोलो कौन उन्हे लेजाऐगा
लुट गई जो आबरू बाजारों में
कौन उन्हें लौटाएगा
भूल गई हैं जो घर
परिवार के सपने
भूल गई जो सम्मान से जीना
बोलो कौन याद दिलाएगा
जिंदा होने का एहसास
आखिर कौन उन्हें कराएगा।  

 

   बबीता खंडूरी
  फरीदाबाद , हरियाणा

Babita Khanduri

मैं बबीता खंडूरी फरीदाबाद हरियाणा की निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस की कवित्री हूँ।

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