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असमंजस भरी ज़िन्दगी – रवि कुमार

असमंजस भरी ये ज़िन्दगी हम यु ही जिये जा रहे हैं,
ना रंग है, ना उमंग है,
ना ही अपनो का संग है,
जिन्दगी के दिन यु ही गिने जा रहे हैं,
असमंजस भरी ये जिन्दगी हम यु ही जिये जा रहे है।

ना परिवार के पास,
ना किसी यार के खास,
ना ही कोई मुस्कुराहट का एहसास,
बस खुसियो से किनारा हम यु ही किये जा रहे है।
असमंजस सी ये जिन्दगी हम यु ही जिये जा रहे है।।

ना भूत से कुछ सिखा ,
ना भविस्य के लिये कुछ दिखा,
वर्तमान के ईस कस्म्कस मे हम,
ये असमंजस भरी ये जिन्दगी जिये जा रहे है।।

ना जीने की कोई इच्छा,
ना मरने का कोई इरादा,
ना रोने की कोई वजह,
ना हसने का कोई वादा,
दिन प्रतिदिन गम के इस दलदल मे यु ही धस्ते जा रहे है,
असमंजस भरी ये जिन्दगी हम यु ही जिये जा रहे है।।

Ravi Kumarरवि कुमार
गुरुग्राम (हरियाणा)

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

1 thought on “असमंजस भरी ज़िन्दगी – रवि कुमार”

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