बचपन की यादें-अशोक कुमार

बचपन की यादें-अशोक कुमार

काश फिर से आता वो दिन जिंदगी में
दे पाता दोस्तो को शायद हर खुशी में
चाहता हूँ देखना बस उनकी मुस्कुराहट
हर पल यकीनन लवो पर हँसी में।

न हो अंधेरा कभी जीवन मे उनके
साथ हमेशा खेला था बचपन मे जिनके
अब तो सारे व्यस्त है अब तो सारे अलग है
जैसे मोतियो की माला के बिखरे हो तिनके

ऐसे कटते थे दिन और सफर आपसी में
काश फिर से आता वो दिन जिंदगी में
घूमते थे गली गली जब होश न ठिकाना था
जीवन मे हमारे कोई ऐसा भी जमाना था
ऐसा खुशनुमा पल फिर से मुझे बिताना था

करता हूँ बैठा -बैठा याद वही घड़ी में
काश फिर से आता वो दिन जिंदगी में
अब तो बचपन का किस्सा भी
ख्वाब बनकर रह गया

ओर पुरानी यादों का किताब बनकर रह गया
खेल खेल के बारी का हिसाब बनकर रह गया
जाना चाहता हूँ फिर से उसी सदी में
काश फिर से आता वो दिन जिंदगी में।

 

 

 अशोक कुमार

कादीपुर, दिल्ली

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comments
  • में अशोक कुमार sahitya लाइव का धन्यवाद करना चाहता हु जो
    जो कि मुझे अपनी बात रखने का सुनहरा अवसर प्रदान किया
    Thankyou so much sahitya live

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