बदल रहे हैं हम – प्रणय कुमार

बदल रहे हैं हम – प्रणय कुमार

कभी जिम्मेदारियाँ उठाने को
कभी अपना बचपना जीने को मन करता है।

कभी किसी काम में लग जाने को
कभी कहीं बेवजह घूमने को मन करता है।

कभी गंभीर बातें सोचने को
कभी हँसी में उड़ा देने को मन करता है।

कभी दो चार पैसे जोड़ने को
कभी बिखेर देने को मन करता है।

कभी अपनो की खुशियों के लिए
कभी अपनी खुशियों के लिए जीने को मन करता है।

कभी उनके दिखाए रास्तों पर चलने को
कभी अपना रास्ता बनाने को मन करता है।

कभी जिम्मेदारियाँ उठाने को
कभी अपना बचपना जीने को मन करता है।।

– प्रणय कुमार
कुर्सेला, कटिहार ( बिहार )

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