बाजार हादसा-अशोक कुंमार

बाजार हादसा-अशोक कुंमार

आपसे टकराने का
हमारा गलत इरादा नही था
किसी से कोई शर्त या वादा नही था
ये तो भीड़ का कसूर था मेमसाहब क्योंकि फासला भी ज्यादा नही था

इन बाजार की गलियों से
जब कोई गुजर कर जाता है
तो यकीन करिये हम पर हल्का सा टच हो जाता है।

यू गुस्से से न देखिए थोड़ा डर लगता है शायद आपको टच करने का असर लगता है

हम भी
नादानी में कुछ कर न बैठे
इस बात का अफसोस हमे उम्र भर लगता है।

शक्ल पर न जाइए
हम भी किसी से कम नही है
आदत बुरी है लेकिन बुरे हम नही है
माना थोड़ी पर्सनेलटी डाउन है
पर इस बात का कोई गम नही है।

पुराने जमाने से ताल्लुक रखते है नया दौर हमे भाता नही है
किसी भी लड़की को पटाने का तरीका हमे आता नही है
मान लीजिए गलती से दिल लग जाये किसी से
तो हमारे नादान दिल को कोई समझ पाता नही है

आस करते है हमे भी कोई न कोई जरूर मिलेगी
कभी तो हमारे लिए किसी के दिल प्यार की कली जरूर खिलेगी
अगर कोई न मिली तो कुछ फर्क नही पड़ता
हमे तो तन्हाई भी चलेगी

 

               अशोक कुंमार

            कादीपुर, दिल्ली

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