बनना चाहते हैं हैवान तो फिर इन्सान बनाये कौन ? – संजय सिंह राजपूत

बनना चाहते हैं हैवान तो फिर इन्सान बनाये कौन ? – संजय सिंह राजपूत

बनना चाहते हैं हैवान तो फिर इन्सान बनाये कौन ?

डूब गये आधुनिकता में, नैतिकता का पाठ पढ़ायें कौन,
बन रहा वीडियो घायल का अस्पताल लेकर जाये कौन।
मानव बना तराजू अब हर रिश्ते को पहले तौलता है,
ठीक नहीं यह आदत उसकी, भला उसको बतलाए कौन।
बनना चाहते हैं हैवान तो फिर इन्सान बनाये कौन ?

ज्ञानी थे जो उनका पहले राजा भी सम्मान किया करते थे,
सुन ज्ञानी की बातें मानव क्या देवता भी आहें भरते थे।
पर आज यह सब ज्ञान की बातें लोगों को समझाये कौन,
प्रेम, एकता, अखंडता, मानवता की बातें बतलाये कौन।
बनना चाहते हैं हैवान तो फिर इन्सान बनाये कौन ?

पश्चिमी सभ्यता को स्वीकार करने का होड़ लग गया,
भारत जैसे संस्कारी देश में अश्लीलता का मान बढ गया।
जन्मों का वादा कर उम्र के आखिरी पड़ाव पर छोड़ दिया।
ऐसे नंगे संस्कृति से भारत की संस्कृति बचाये कौन,
बनना चाहते हैं हैवान तो फिर इन्सान बनाये कौन ?

आधुनिक संगीत के युग में कृष्ण भजन अब गाये कौन,
बाबा मौलवी बलात्कारी हो गये धर्म का पाठ पढ़ायें कौन।
राजनीति भी हो रही अब जाति-धर्म के आधार पर,
जुम्मन और तिवारी जी के दोस्ती की कहानी सुनाए कौन।
बनना चाहते हैं हैवान तो फिर इन्सान बनाये कौन ?

Sanjay Singh Rajputसंजय सिंह राजपूत

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