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बरसो रे – राजपुत कमलेश “कमल”

बरसो रे. . . . . बरसो रे. . . . ,
प्रेम सुधा बरसो रे! -२
धानी चुनरिया मोहे ओढा कर,
प्रित के रङ में उसको रङाकर,
प्रेम से हरशो रे!!
बरसो रे. . . . . बरसो रे. . . . ,
प्रेम सुधा बरसो रे!
मधुर सुरा का जाम बनाकर,
इन अधरो की प्यास बुझाकर,
प्रेम से हरशो रे!!
बरसो रे. . . . . बरसो रे. . . . ,
प्रेम सुधा बरसो रे!
अंगों से मेरे अङ मिलाकर,
इन सान्सो में आज समाकर,
प्रेम से हरशो रे!
बरसो रे………बरसो रे. …. ,
प्रेम सुधा बरसो रे!
सुन सजना कहेते है नयना,
तेरे बिना मुझको नही रहना,
तारो से मेरी माङ सजाकर,,
प्रेम से हरशो रे!!
बरसो रे….. बरसो रे……,
प्रेम सुधा बरसो रे!-२
🍁🌳🌲🍁🌳🌲🍁

Kamlesh Rajput(Kamal)राजपुत कमलेश “कमल”
अहमदाबाद (गुजरात)

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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