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बचपन-दिव्यांश-सिंह

बचपन छोटा जीवन अंकुर,
वृक्ष कपोले निगल के आया|
ममता भरी इन आंखों में,
इक आशीर्वाद संभल के आया|
तो छोटे जीवन को मां तुम,
मेरी सांसो में ला देना |
बचपन की छोटी बातें सब,
खुशी से हमको बता देना|
अब भी हसीन सपने,
आंखों में पल रहे हैं|
मां सुलझी हुई है यादें,
मगर हम उलझ रहे हैं|
अब भी हमारी यादें,
सांसो में छाई माता|
लाओ मां मुझको यादें,
खुशबू सजाओ माता|
छोटे कार्य बड़े नतीजे,खुशी की मार दिखाओ ना,
मां मेरी बचपन को तुम, वापस तो लौटाओ ना|
क्या खूब माता सपने आंखों में आ रहे हैं,
जिंदगी हुई है ओझल, आंसू बहा रहे हैं|
पापा मेरी यादों में, कुछ तो बताओ ना,
मेरी यादों को आप, मुझसे छुपाओ ना ||

वह खेलने में ,हारने में,
खुद से रूठ जाना|
रोने की मेरी आदतें,
और मां का वह मनाना|
मैं कैसे भूल जाऊं,
खाना तेरा बनाना|
जो मैं ना खाऊं खाना,
तो प्यार से खिलाना||
लाइफ में प्रॉब्लम का फिर ऐसे हुआ ना,
सपनों को ढेर करना, और मां का वह बदलना|
हो गए जवां हम,आसाऐ भारी आई,
सबको कैसे करता मैं वहां सेटिस्फाई |
tension में हुई life,
हंसी का खो जाना|
पैसा था कमाना,
शौक को था भूल जाना|
हो गई है शादी,
बच्चों का आया खर्चा|
life बनी है cycle,
भरता हूं रोज पर्चा |
हसीन स्वप्न टूटा,
आंखें भर आई|
बोझ था जीवन का,
सब भूल गया भाई|
बचपन को खोजता हूं ,और लौट घर को आता,
यादें पुरानी मैं तो, कभी भूल नहीं पाता ||
यादें पुरानी मैं तो, कभी भूल नहीं पाता ||

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