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बेनाम मुहब्बत-MK-निर्माण

Posted by -Meenu Rani

मुहब्बत शायद इन्सानी फितरत से अलग होकर कही दूर ना चली जाऐ इसलिए अभी वक़्त है कि इन्सान तू मुहब्बत करना सीख ले वरना फिर ना कहना कि खुद ब खुद बरबादी का जरिया बन गया हूं मै ।Read More-
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किसी इंसान की ज़िन्दगी बिना मुहब्बत पूरी कब हुई है जो तेरी हो जायेगी।नफरत करने वाले बरबाद हो जाते है मगर अकसर ऐसा होता है कि यही वो लोग होते है कि चाहने वालो को कभी एक नही होने देते।जिन्हे जीने के लिए जिन्दगी मयस्सर नही होती और एक दूसरे का साथ नही होता ।अकसर ऐसा होता है कि उनकी चिताए एक साथ जलते हुए देखी जाती है।कितनी अजीब बात है ना।
मगर ये सच है।इनसान कितना भी इनक़ार कर ले मगर उसे तलाश है प्यार की लेकिन सिर्फ अपने लिए ।अगर कोई ओर मुहब्बत करे तो लोगो को यह समाज विरोधी कार्य नजर आता है।

सबको इसकी जरूरत है ।अगर नही तो फिर अगर हमारे किसी करीबी के कोई दूसरा करीब आ जाए तो हमे जलन होने लगती है।ये मुहब्बत नही तो ओर क्या है। हम किसी भी मुल्क़ मे रहते हो ,कोई भी भाषा बोलते हो ,कोई अमीर आदमी हो या गरीब। जब कोई आदमी काम के बाद थककर घर लौटता है तो वो चाहता है कि कोई तो हो जो उसे सुकून देने वाली निगाहो से देखे ,और होता भी है कहीं कहीं कि घर के दरवाजे पर कोई बेसब्री से उसका इन्तजार कर रहा होता है ।इक चाहने वाला जिसे देखकर आपकी आंखो मे एक चमक एक नूर दिखाई देता है और आपको देखकर उसकी आंखो मे।तो फिर कहिये कि ऐसा होता है कि नही ।
जी हां बेशक ऐसा ही होता है मगर फिर भी क्यूं समझने को तैयार नही।

                    मै जिस राह से गुजरी,
                    गमोगम मिले मुझको।
                    लोग मिले बेहद लेकिन ,
                    इश्क  वाले कम मिले मुझको।।

एक छोटा बच्चा जब अपनी माँ की तरफ देखता है तब उसके चेहरे पर अलग ही चमक अलग ही नूर होता है ।एक माँ अपने बच्चे की सुरक्षा के लिये उसकी हिफाजत के लिए करोडो जुर्म सह जाती है।करोडो सलाम है उस माँ को।जब माँ और बच्चे की इस मुहब्बत के बीच कोई मजहब ,कोई जाति पाति नही है तो फिर,
तो फिर उन दो इन्सानो के लिए ये बन्दिशे क्यो।वो भी उस खुदा,उस ईश्वर का ही एक रूप है।

                                     तेरी आबो हवा भी अब मुझे रास नही आती ,  
                        मै बाकी हूं आधी,आधी मर चुकी हूं।।                        

एक पेड सूख जाए तो दूसरा लगाया जा सकता हैःमगर ,अगर जहन से मुहब्बत ही ख़त्म हो गयी तो लमहे भी साल के जैसे दिखाई देगे।बिना इसके जिन्दगी किसी बद दुआ के जैसी ही है जैसे जिन्दगी थोप दी हो जीने के लिये।

अमीर लोगो के पास बडे बडे घर है मगर उनमे रहने के लिये जगह नही
क्योकि जगह घर मे नही दिल मे होनी चाहिये बहुत कम इंसान है जो उस पाक मुहब्बत को महसूस करते है।
जैसे बंजर जमीन मे कभी फूल नही उगते वैसे ही बहुत कम को ये मयस्सर होती है।

                                        मै जलाती रहूंगी मशाल से,
                          इश्क के चराग को।
                          नफरत की आँधी अब तू इस ओर ना आना,
                          जल जायेगी बेखबर अँगारो मे लिपट के।।

दिल हर बार एक आस करता है कि कहीं ना कहीं तो वो जगह होगी जंहा आशाओ की छत वाला मकान होगा,वो छत जो कमजोर और जर्जर होने पर भी अपनी पीठ थपथपाकर खुद को हौसला देती हो,मुहब्बत का आँचल ,जो खिडकी पर टंगा हुआ हो ओर जब वो उडता हुआ चेहरे को छुए तो लगे कि किसी चाहने वाले ने छू लिया हो।चूडी कंगन बिंदिया और कपडो से भरी अलमारी जो खुद ब खुद किसी दुल्हन के जैसी हो।
तो फिर किसी इन्सान की जरूरत ही कहां है और ये असल बात है कि आज किसी को इनसानो की जरूरत नही है।अच्छा होता कि वाकई कहीं एसी जगह होती तो किसी सजा या दगा की गुजांइश ना होती।

                          जिसे ख़ाबों मे देखा ,मै वो जहान ढूंढ़ती हूं,
                          मुहब्बत की दरो दीवार का मकान ढूंढती हूं।।
                          जो मेरे हुक्म से वाक़िफ़ हो ,बिन बुलाये ही आ जाये।
                          मै अपनी ज़िंदगी मे उस गुलाम को ंढूंढती हूं।।








                                        मुहब्बत  भी हैरान है इस जहां मे आकर,
                         गम ही गम पीये मैने,
                         हौठ सिल लिये मैनै,
                         जख्म  खाये खुदा मैने,तेरे जहन्नुम  मे आकर।।





                           अब मुझे छूले कोई पाक     
                           दिल ,पनाहो मे लेकर।
                           मालिक मै तेरे जहन्नुम मे,
                           नापाक हो रही हूं।।






                           कि होगी कोई अदालत जो 
                           दिल के मुकदमे लेगी,
                            कि मुहब्बत मे फिर किसी को ,
                           कोई सजा ना होगी।।

इस मुहब्बत को यू ही जमीं पे आबाद जीने दे । तू अहसास कर और मुझे महसूस होने दे।

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