बेताब दिल-अशोक कुमार

बेताब दिल-अशोक कुमार

कब आएगी वो घड़ी
जब आप सामने होंगे हमारे
बड़ा बेचैन हूँ सनम
दर्शन को तुम्हारे

यू अपनी कातिल आंखों से
घायल न करो
बस दो। चार बाते करके
कायल न करो
दीवाना तो वैसे ही हूं आपका
पर पागल न करो

कभी थोड़ा समय निकाल कर
पास बैठा करो हमारे
बडा बैचैन हुँ सनम
दर्शन को तुम्हारे

अब कुछ नही नजर आता
वो आपका पलके झपकाना
भोली भाली सूरत का
धीरे से मुस्काना
याद आता है बड़ा आपका
यू हम पर बिजलिया गिरना
देखने को तरस गए है
आपके वो हसीन नजारे
बड़ा बैचैन हू सनम
दर्शन को तुम्हारे

अब तो सूनी लग रही है
हर गली हर तरफ
नजर आ रही है
मुझको दीवारे
बड़ा बैचैन हूं सनम
दर्शन को तुम्हारे

कब आएगी वो घड़ी बता दो न

 

 अशोक कुमार
कादीपुर, दिल्ली

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