बेटियां आन होती हैं

बेटियां आन होती हैं,
बेटियां शान होती हैं ,
हर एक देहलीज़ की ..
अपनी बड़ी पहचान होती है,
किसी बापू के कांधे अब कभी भी
झुक नही सकते ….
कलेजे के ये टुकड़े हैं ,
ये स्वाभिमान होती हैं |
मुकद्दर के सिकंदर
अब यंहा बेटे ही नही होते ,
शिखर ऊँची पे …
जा कर के ये तो
परचम लहराती हैं ,
जूनून इनमे भी है इतना की
सागर पार कर लेंगी ,
अकेली ये बने नैया
जो दो कुल को तराती हैं |
बिना बेटी के घर – आंगन
सदा सूना ही रहता है ,
बेटियां है नही अभिशाप
ये तो बरदान होती है ,
“तराना” तू तराने में ये सब कह नही सकता ,

बेटियां ……
छन्द सी हैं पर …
ये तो महाकाव्य होती हैं ||

By:

लेखक : थानसिंह “तराना”
पता : झलकपुर, धनवाडा, कुम्हेर,भरतपुर,
फ़ोन : 9351423547 Email: rasustudiolive@gmail.com

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