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** बेटी **-अखिलेश-श्रीवास्तव

पिता की आत्मा माँ का ,अभिमान है बेटी !
पूर्व जन्मों के पुण्य का ,परिणाम है बेटी !!
मेरे जीवन का वो , बहुत सुनहरा दिन था !
जिस दिन मेरे घर ,आई थी प्यारी बेटी !!
पहली बार जब उसे, गोदी में उठाया मेंने !
अजीब -प्यार और , वात्सल्य पाया मैनें !!

उसका बचपना जब भी , हमें याद आता है !
होंठों पर खुशी ,मन प्रफुल्लित हो जाता है !!
याद आती है उसकी ,वो तोतली बोली !
जैसे कि ईश्वर ने , प्रक्रति में मिश्री घोली !!

बचपन में जब उसे , नींद आती थी !
दौडकर मेरे पास, आ जाती थी !!
लोरी सुनते -सुनते ,गोदी में लेट जाती थी !
आँखें मेरी बंद कराती , पर खुद सो जाती थी !!

ईश्वर की इस कृति को, समय के साथ चलना है !
आगे बड़ा होकर ,अपना जीवन भी संजोना है !!
हमारी शिक्षा -संस्कार,प्यार से पूर्ण है बेटी !
मेरे परिवार की अमूल्य , धरोहर है बेटी !!
धन पराया नहीं ,घर की लक्ष्मी है बेटी !
दो -दो कुलों की शान , होती है बेटी !!

‘न ‘ होंगी बेटी , तो बहू कहाँ से लाओगे !
बिना बहू के कुल, को कैसे बढाओगे !!
माँ का गहना ,पिता का अभिमान है बेटी !
हमसे दूर रहकर भी ,हमारे पास है बेटी !!
समाज में खुशी, और सुखद जीवन पाना है !
बेटी को प्यार और दुलार से अपनाना है !!

                  रचयिता  :---- अखिलेश  श्रीवास्तव 

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