बेटी बचाओ-मुकेश नेगी

बेटी बचाओ-मुकेश नेगी

क्या सबूत इंसानो ने रखा औलिया के मान का,
सौदा कर बैठे यहाँ नन्ही सी नाजुक जान का ।
मुस्कान इनकी देखके कुछ खुश हुए कुछ हैं दुखी,
होगा आगे चलके क्या वंश आखिर शान का ।
दर्गाह,मंदिर जा रहे कुछ भोग ले इस आश मे
चित्त मे है बस यही सोचते होगा असर क्या दान का ।

 

   मुकेश नेगी

 रैवला, देहरादून

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