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बेटी की पुकार-सुमन मेहरा

ख्वाबों में खोई हुई अंजान सी लड़की हूं मैं, आसमां के बादलों से बरसती हुई बूंद हूं मैं।भगवान का दिया हुआ वरदान हूं मैं, दुनिया की तरक्की की सोच हूं मैं, फूलों से महकती हुई खुशबू हूं मैं, आंगन में लगी हुई तुलसी हूं मैं। घर की इज्जत हूं मैं, सीता जैसी पवित्र नारी हूं मैं,मां बाप के सर का ताज हूं मैं, घर की रोशनी हूं मैं। पति की रक्षा करने वाली सत्यवती नारी हूं मैं, दुष्टों का संहार करने वाली दुर्गा हूं मैं। ख्वाबों में खोई हुई अंजान सी लड़की हूं मैं, आसमां के बादलों से बरसती हुई बूंद हूं मैं

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