बेटियां बोझ नहीं होती – सपना सिंह

बेटियां बोझ नहीं होती – सपना सिंह

मा की आंखों का तारा बबूल की जान से प्यारी थी भाई की लाडली थी।
जिसने उसे जन्म दिया मा की लाडली थी।
ना कवि किसी।
दिल दुखाया ना कवि सताया फिर क्यों उसी बेटी को बोझ समझ उस बेटी का विवाह कराया।
दुनिया की यही रीत केह बबूल ने उसे डोली में बिठाया ।
फिर भी यही उसकी खुशी है।
स्समज उसने दुनिया की रीत को अपनाया फिर क्यों उसी ससुराल वालों ने उस बेटी को जलाया ।
मा का रो रो कर बुरा हाल था बबूल ने भी सोचा क्यों बेटी का ब्याह कराया।
कभी दहेज के नाम पर बहू को तो कभी बेटी को गर्व में ही मरवाया।
ये सोच बदलो दुनिया वालों बेटी ही कल है।
बेटी ही।नहीं होगी तो तुम कहा से होंगे बेटियां बोझ नहीं होती।
उसे पढ़ाओ और आगे बढ़ाओ उसे दुनिया से लडने सिखाओ ताकि कल उसे अपने ऊपर गर्व हो।
जिसे देख दुनिया की हर लड़की आगे बड़े।
बेटियां शान है तुम्हारी।

Sapna Singhसपना सिंह
पटना, बिहार

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