बेवफाई – प्रांशुल शर्मा

बेवफाई – प्रांशुल शर्मा

किसी को इतना भी क्या याद रखना की सजा बन जाये
चाहा था मैंने उसको इतना की पत्थर भी दिल बन जाये
लगता है उसकी नजरे कुछ कमजोर है जो देख ना पाई
क्योंकी इस दिल मै हर जगह है उसकी परछाई
वह तो खेल गई मेरे इस दिल से कर दी बेवफाई
अब उस चोट का क्या जो मैंने इस दिल पर खाई ?

—प्रांशुल शर्मा
कानपूर, उतर प्रदेश

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