भारत बंद-दीप जांगड़ा

भारत बंद-दीप जांगड़ा

इब भाईचारे निपट लिए हर बार पै भारत बंद होगे ।
नीयत फीटक की लोगां की लालच मैं मन्दे मन्द होगे ।।

कोई मर्यादा ना रही बीर की ना शब्द रहया बड़ाई का
झूट नीचता बिकण लाग गी ना मिलै गाहक सच्चाई का
ज़मीदार के घर मैं जनमै बालक बदमाशी मैं नाम कमावै
नाम डूब ज्या कुणबे का जब उल्टे सीधे कर्म रचावै
जात पात के पाठ पढ़ावैं जमा नीच सत्संग होगे ।
इब भाईचारे निपट लिए हर बार पै भारत बंद होगे ।

कोई आज़ादी तै सीख नही बेटी भींता मैं कैद रहवै सै
काबिलियत बतलावण नै क्यों लाड़ो जद्दोजहद रहवै सै
एक तरफ़ तै नारे लागै जितणा होवै बेटी बचा ल्यो
दूसरी ओड़ तै छूट मिलै जै मौका लागै नोच कै खा ल्यो
हाथ जोड़ कै वोट मांगणिये सबतै बड़े मलंग होंगे ।
इब भाईचारे निपट लिए हर बार पै भारत बंद होगे ।

भांग के भाडै गए शहीद जो आज़ादी के लिए लड़े
हालात देख ल्यो आज के लोगो ग़ुलाम होण नै अड़े खड़े
फ़ेर होणा चाहिए बंद यू भारत जब आवै आंच कदे नार पै
ख़ुद लड़ लड़ कै मर जावैंगे हम ना पड़ै फ़र्क सरकार पै
कुर्सी के चक्कर मैं आज कानून व्यवस्था भंग होंगे ।
इब भाईचारे निपट लिए हर बार पै भारत बंद होगे ।

के लिखूं किसान की ख़िदमत मैं कति माड़े लेख लिखवा रया सै
कदे सुक्का चाम सुका दे सै बादळां नै डुबो कै मारया सै
सुख तै उठ ज्या फ़सल आज होरी सै सुआसण नार जीसी
सरकार भी घर तै काढ़ै सै अर राम या तेरी कार किसी
क्यूकर कलम चला ले “दीप” आज कलम के रस्ते मन्द होगे ।
इब भाईचारे निपट लिए हर बार पै भारत बंद होगे ।

 

  दीप जांगड़ा

 

 

 

 

 

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