भाग दौड भरी जिन्दगी – रवि कान्त अगृवाल

भाग दौड भरी जिन्दगी – रवि कान्त अगृवाल

सुबह जल्दी उठकर देर रात सोना
दिन भर कुछ पाना कुछ खोना
कभी रब की इबादत
कभी खुदा की बन्दगी

यहीं हैं भाग दौड भरी जिन्दगी

पुरे दिन काम मे रहना
थककर ना किसी से कुछ कहना
अपनों से की बेवफाई
तो परायों से कर ली दिल्लगी

यहीं है भाग दौड भरी जिन्दगी

रवि कान्त अगृवाल

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