भ्रष्टाचार-दीपांशा श्रीवास्तव

भ्रष्टाचार-दीपांशा श्रीवास्तव

दो शब्दो का मेल है शब्द यह “भ्रष्टाचार”,
अर्थ है इसका,करना सबका भ्रष्ट जीवन और आचार।
भ्रष्टी लोग करते इसको इतना गहरा‌ यार,
समझ न आए नेताओं को जिसका कोई‌ उपचार।
गहरी इतनी जड़े है इसकी सोचो मेरे यारों,
देश का आजतक मिट पाया भ्रष्टाचार प्यारों।
भ्रष्टों का तो काम है भ्रष्टाचार बढा़ना,
हितकारी इस देश को अनहितकारी बनाना।
आओ यारों
मिलकर हम सब ,कसम आज ये खाए,
बढ़ने अब इसको न देंगें।
करने कोई सितम न देंगे ,
आओ,
अब‌ हम अपना फर्ज निभाएं,
अपनी ताकत इन्हें दिखाएं।
ढूंढ कोई उपचार महान, भ्रष्टाचार करें खत्म,
ऐसे पुण्य को करके आज हम, महान कार्य करके दिखलाएं।
अशुध्द देश को, शुध्द बनाएं,
अशुध्द देश को,शुध्द बनाएंं।
‌‌‌‌‌‌‍‍‍ज‌य हिन्द, जय भारत

 

दीपांशा श्रीवास्तव
शाहजहांपुर,यूपी

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