चाॅद मेला – चेतन वर्मा

चाॅद मेला – चेतन वर्मा

चाॅद मेला नाराज़ है …
पल-पल हर पल लडता है …
नासमझें वो नदान है …
दिल से प्यार जो करता है …

कैसे उसको समजझाऊ ….
पागल रूह पर मरता है …
खुश्बू कैसे पहचानु …
जान-ए-जिगर में बसता है …

कैसें उसको बतलाऊ …
हालत से पगला अनजान है ….
कब तक उसको तडपाऊ…
फितरत में बसती जान है …

कैसें उसको भूलाऊ…
दिल का रिस्ता सच्चा है …
नाजाने वो दिल-का-अलाम …
दीवाना पागल-पागल फिरता है …
चाॅद मेला नाराज़ है …

chetan vermaचेतन वर्मा (बुन्दी)
राजस्थान

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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