चटपटा सा स्वाद – थानसिंह”तराना”

चटपटा सा स्वाद – थानसिंह”तराना”

चटपटा सा स्वाद जिंदगी का चख लिया,
मैंने भी तो चुपके-चुपके प्यार कर लिया।
सबसे नज़र बचाके उसको निहारता था,
खामोश निगाहों से दीदार कर लिया।
वो आईने के जैसे सच- सच वयान करती,
इसी अदा से मुझको अपना जो कर लिया।
तमाम उम्र मैं भी तन्हा-तन्हा रहा था,
दिल में बसा के मुझको गिरफ्तार कर लिया।
सूरत में चाँद उसकी मुझको दिखाई देता,
अब तारों में निशेमन मैंने जो कर लिया।
कोई न सरगम थी मेरे दिल के तरानों में,
तूने”तराना”कैसा ये चमत्कार कर लिया।

साहित्य लाइव रंगमंच 2018 :: राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी प्रतियोगिता • पहला पुरस्कार: 5100 रुपए राशि • दूसरा पुरस्कार: 2100 रुपए राशि • तीसरा पुरस्कार: 1100 रुपए राशि & अगले सात प्रतिभागियों को 501/- रुपये प्रति व्यक्ति

Than Singh Meenaथानसिंह”तराना”
भरतपुर(राजस्थान)

चटपटा सा स्वाद – थानसिंह”तराना”
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