चितचोर – सोनी कुमारी

चितचोर – सोनी कुमारी

बाबरे रसिया मन चितचोर,
ओ रे पिया बहियाँ न मरोड़,
हम तो तेरे ही हैं सजन,
फिर भी ये कैसी अग्न,
तेरे बिन न जियूं,
तेरे बिन न मरु साँवरें,
साँझ ढले रातें महकनें लगी
लगी कैसी लगन
तुझसे ओ सजन
लब पे तेरा ही नाम
सूबह हो या शाम,
तेरे बिन न जियूं
तेरे बिन न मरुं बाँवरे
ओ रे पिया मरी बहियाँ न मरोड़
बाँवरे रसिया मन चितचोर!!

Sony Kumariसोनी कुमारी
पूर्णिया (बिहार)

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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