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** चिठ्ठी -अखिलेश-श्रीवास्तव

अपने दूर बसे लोगों की, खैर खबर होती थी चिठ्ठी !
शब्दों के मोती की माला ,होती थी वो प्यारी चिठ्ठी !!
प्रेम,प्यार की अभिव्यक्ति का,आलेख होती थी चिठ्ठी !
प्रेमी और प्रेयसी के प्यार की ,गहराई होती थी चिठ्ठी!!

नए जीवन के आने की ,खुशखबरी लाती थी चिठ्ठी !
अपनों की शादी का संदेशा, भी लेकर आती थी चिठ्ठी !!
परीक्षा के परिणामों को ,हम तक पहुंचाती थी चिठ्ठी !!
नौकरी लग जाने की खबर,लाती थी सरकारी चिठ्ठी !!

प्रतिदिन पोस्टमेन का हमको ,इंतजार करवाती चिठ्ठी !
अपने बीते हुए दिनों की,हमको याद दिलाती चिठ्ठी !!

एक समय था जब हमारी , प्राणवायु होती थी चिठ्ठी !
अपने बीते समय की यादों में,खो जाती है ये चिठ्ठी !!
आज सभी से हाथ जोड़कर ,विनती करती है ये चिठ्ठी !
अपना लो फिर से मुझको तुम,यही आश करती है चिठ्ठी !!

               रचियता :-- अखिलेश  श्रीवास्तव 

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