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छोड़ो भाषा की भेद भाव

आज भी कितने लोग हैं जो भाषाओं पे लड़ते हैं उनसे मैं कहना चाहूं चाहे जिस भी भाषा में हो लोग तो आखिर बातें ही करते हैं। यूं तो बातें गूंगे भी समझ लेते हैं। लेकिन उनसे मैं क्या कहूं जो लोगों के बातें सुनने से पहले उसके भाषा पर हंस देते हैं। जो लोग किसी के भाषा की मजाक बनाते हैं। क्या वह लोग खुद दुनिया की। हर भाषा कह पाते हैं। आखिर भाषा एक जरिया है, बातों को आगे बढ़ाने की। और किसी को हक नहीं, इसकी मजाक उड़ाने की। बच्चे जब पहली बार अपने जुबा पर मां की नाम लाती है। चाहे जिस भी भाषा में हो मां के मन को सुकून दिलाती है। बच्चे चाहे तब किसी भी भाषा को चुना। लेकिन माने सिर्फ उसके दिल की आवाज को सुना। तब मां बाबा ने अपने भाषा बच्चे को सिखाया ताकि एक दूसरे से अपनी दिल की बात कर पाए। और किसी को हक नहीं उन के भावनाओं का मजाक उपाय। इंसान की अपनी भाषा उसके लिए खास होता है। क्योंकि इस भाषा में उसने अपनी जिंदगी की पहली बात रखी जिससे उसे जिंदगी भर खुशियों का एहसास होता है। अगर सुनना ही हैतो किसी की दिल की बात सुनो। क्योंकि अगर किसी की दिल की बात जानना चाहोगे। तो बिन कहे भी जान जाओगे। अगर बचपन की तरह लोगों की बातें जानना चाहोगे। तब चाहे कितनी भी मुश्किल भाषा हो तुम आसानी से सीख जाओगे। इसीलिए कोई क्या कहना चाहता है उस पर ध्यान दो, किस भाषा में कह रहा है उस पर नहीं। आखिर समझ ही जाओगे तुम उसकी बातें रोक ना पायेगा तुमको कोई। तो आओ भाषा की भेदभाव को पीछे छोड़ चले। दिल से निकली बातों को लगाए गले।

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sonamoni-Debnath

sonamoni-Debnath

Writer .Sonamoni Debnath. Born in 1999 I'm always trying to prove myself

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