चुनाव एक खेल-रोहिताश सिंह

चुनाव एक खेल-रोहिताश सिंह

हमारे यहाँ की राजनीति में चुनाव दंगल सा कोईहो जाता है,
जहा हर नेता राजनीति के अपने दांव लगाता है,
विपक्षी और पक्षी टीमो का बटवारा हो जाता है
सारे फैसले ,सारे कार्यक्रम बंद कमरों में तय हो जाते हैं,
चुनाव का माहौल कुछ
वैसे भी कुछ अलग सा होता है,
जहा एक मत भी,
लाखो मतियो पर भारी सा हो जाता है,
कोई गाँधी ,कोई पटेल ,कोई अम्बेडकर के ।नामों,
पर मतसागर में छलांग लगाता है,
इस चुनावी रेस को हर कोई जीतना चाहता है,
रेस पीछे न रह जाये,
इसलिए कोई साईकिल, कोई विकास कि गाडी पर दौड लगाता है,
खरगोस और कछुए की कहानी से हटकर यह जीतता वही है,
जो जनता में को भाता है
जनता मैन को भाता है,

 

 रोहिताश सिंह

अलवर राजस्थान

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